
ज़्यूरिख, 20 नवंबर 2025 — यूरोपीय फुटबॉल संघ (UEFA) ने आधिकारिक रूप से उन 16 टीमों की सूची जारी की है जो 2026 फीफा विश्व कप के लिए यूरोप से अंतिम चार स्थानों को निर्धारित करने वाले प्लेऑफ़ दौर में भाग लेंगी। ड्रॉ का आयोजन पिछले शुक्रवार को ज़्यूरिख स्थित मुख्यालय में किया गया था।
प्रतियोगिता का प्रारूप पहले जैसा ही रहेगा, जिसमें चार ब्रैकेट (A–D) में विभाजित दो-मैच नॉकआउट प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। मुकाबलों का आयोजन मार्च 2026 के फीफा अंतरराष्ट्रीय विंडो में होगा:
सेमीफ़ाइनल: 26 मार्च
फ़ाइनल (ब्रैकेट विजेता तय करने के लिए): 31 मार्च
चारों ब्रैकेट के विजेताओं को 2026 विश्व कप में स्थान मिलेगा, जिसकी मेजबानी संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको करेंगे।
सबकी नज़रें ब्रैकेट A पर हैं, जहाँ चार बार की विश्व चैंपियन इटली, जो 2022 विश्व कप में क्वालीफाई नहीं कर पाई थी, को पहले मुकाबले में नॉर्दर्न आयरलैंड का सामना करना होगा।
यदि इटली सेमीफ़ाइनल में जीतती है, तो उसे वेल्स बनाम बोस्निया एंड हर्ज़ेगोविना के विजेता से भिड़ना होगा। इसका मतलब है कि इटली को लगातार दो नॉकआउट मैच जीतने पड़ सकते हैं ताकि पिछली निराशा दोबारा न हो।
इसी तरह ब्रैकेट B भी बेहद दिलचस्प है, जहाँ यूक्रेन का मुकाबला स्वीडन से होगा — यह दोनों पिछले प्लेऑफ़ (2022) में भी भिड़े थे, जिसमें यूक्रेन ने 2–1 से जीत दर्ज की थी। दूसरी ओर पोलैंड, जहाँ रॉबर्ट लेवांडोव्स्की ( उम्र 38 वर्ष ) संभवतः अपने अंतिम विश्व कप की उम्मीद में उतर सकते हैं।
ब्रैकेट C और D भी कमजोर नहीं हैं:
तुर्की, रोमानिया, स्लोवाकिया और कोसोवो — जिनके पास यूरोप की टॉप लीग्स में खेलने वाले 20+ खिलाड़ी शामिल हैं।
वहीं ब्रैकेट D में डेनमार्क, जो यूरो 2024 के बाद से शानदार फ़ॉर्म में है, का सामना नॉर्थ मैसिडोनिया से होगा — यह वही टीम है जिसने 2022 प्लेऑफ़ में “इटली को बाहर” किया था।
UEFA ने कहा कि प्लेऑफ़ विजेताओं को 31 मार्च 2026 को मैच समाप्त होते ही अपने विश्व कप ग्रुप के बारे में पता चल जाएगा। उन्हें 2026 विश्व कप मैच शेड्यूल में निर्धारित खाली स्लॉट्स में रखा जाएगा, जिसका पूरा कार्यक्रम अप्रैल 2026 में जारी किया जाएगा।
यह यूरोपीय प्लेऑफ़ न सिर्फ अंतिम चार टिकटों का फैसला करेगा, बल्कि यह भी साबित करेगा कि नया क्वालीफिकेशन सिस्टम, जिसमें विश्व कप क्वालीफायर्स और UEFA नेशंस लीग दोनों के परिणाम शामिल हैं, क्या वाकई मिड-लेवल टीमों के लिए समान अवसर प्रदान कर सकता है या नहीं।
